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20/09/2026 4:53 pm

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BIT Mesra FRSM 2026…‘इंटेलिजेंट एंड इनक्लूसिव साउंड’ पर फोकस

BIT Mesra FRSM 2026

रांची स्थित बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान यानी BIT Mesra में 21 और 22 अगस्त 2026 को स्पीच और म्यूजिक के क्षेत्र में अनुसंधान की नई संभावनाओं पर महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंथन होने जा रहा है। संस्थान के गणित विभाग और जादवपुर विश्वविद्यालय, कोलकाता के सर सी. वी. रमन सेंटर फॉर फिजिक्स एंड म्यूजिक के संयुक्त आयोजन में 30वें इंटरनेशनल सिम्पोजियम ऑन फ्रंटियर्स ऑफ रिसर्च इन स्पीच एंड म्यूजिक यानी FRSM 2026 का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन बीआईटी मेसरा, रांची परिसर में होगा और इसका मुख्य फोकस स्पीच, म्यूजिक और मानव-केंद्रित तकनीकों के बीच बढ़ते वैज्ञानिक संबंधों पर रहेगा।

‘इंटेलिजेंट एंड इनक्लूसिव साउंड’ पर फोकस

FRSM 2026 की केंद्रीय थीम “Intelligent and Inclusive Sound: Bridging Speech, Music & Human-Centered Technologies” रखी गई है। इस थीम के माध्यम से यह समझने की कोशिश की जाएगी कि आधुनिक तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, गणितीय मॉडल, ध्वनि विज्ञान और कम्प्यूटेशनल तकनीकें इंसानी आवाज और संगीत को समझने, उनका विश्लेषण करने तथा उनके नए उपयोग विकसित करने में किस तरह मदद कर सकती हैं। आयोजन का उद्देश्य केवल तकनीकी उपलब्धियों पर चर्चा करना नहीं है, बल्कि ऐसी तकनीकों की संभावनाओं को भी तलाशना है जो मनुष्य की जरूरतों, अनुभवों और सामाजिक समावेशन को ध्यान में रखकर विकसित की जा सकें।

स्पीच से म्यूजिक और AI तक शोध

सिम्पोजियम में Speech Technology, Music Technology, Artificial Intelligence, Acoustics और Computational Techniques से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श होगा। स्पीच और ऑडियो सिग्नल का विश्लेषण, स्पीच रिकग्निशन, स्पीच सिंथेसिस, भाषा और भाषाविज्ञान, संगीत सिग्नल प्रोसेसिंग, संगीत संश्लेषण, संगीत की पहचान, मशीन लर्निंग और संगीत में AI जैसे क्षेत्र इस व्यापक शोध दायरे का हिस्सा हैं। FRSM की आधिकारिक जानकारी में स्पीच-हियरिंग, म्यूजिक, लैंग्वेज एंड लिंग्विस्टिक्स तथा इंटरडिसिप्लिनरी एप्लीकेशन जैसे व्यापक शोध क्षेत्रों को शामिल किया गया है। “BIT Mesra FRSM 2026″

आवाज को समझने में AI की भूमिका

आज के दौर में Artificial Intelligence और Speech Technology का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। मोबाइल फोन के वॉयस असिस्टेंट से लेकर ऑटोमैटिक ट्रांसक्रिप्शन, स्पीच-टू-टेक्स्ट, भाषा अनुवाद और वॉयस आधारित एप्लीकेशन तक आवाज से जुड़ी तकनीक रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है। FRSM 2026 जैसे आयोजन में इन तकनीकों के वैज्ञानिक आधार, उनकी सीमाओं और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा महत्वपूर्ण होगी। खास तौर पर अलग-अलग भाषाओं, उच्चारणों और कम संसाधन वाली भाषाओं के लिए बेहतर स्पीच सिस्टम विकसित करना शोध का महत्वपूर्ण क्षेत्र बन रहा है। FRSM की शोध विषय सूची में स्पीच रिकग्निशन, स्पीच ट्रांसलेशन, वॉयस असिस्टेंट, स्पीकर रिकग्निशन, डीप लर्निंग और मल्टीमॉडल स्पीच प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्र शामिल हैं। “BIT Mesra FRSM 2026″

संगीत और तकनीक का नया संगम

सिम्पोजियम में Music Technology और Computational Music से जुड़े शोध पर भी विशेष ध्यान रहेगा। संगीत की धुन, ताल, स्वर, वाद्य यंत्रों की ध्वनि और भावनात्मक प्रभाव को गणितीय और कम्प्यूटेशनल तरीकों से समझने का क्षेत्र तेजी से विकसित हुआ है। मशीन लर्निंग और AI के माध्यम से संगीत की पहचान, वर्गीकरण, रचना, अनुशंसा और विश्लेषण जैसी तकनीकों पर दुनिया भर में शोध हो रहा है। FRSM के शोध क्षेत्रों में AI in Music, Automatic Music Composition, Music Information Retrieval, Music Recommendation, Music Recognition, Music and Neuroscience तथा Music Perception and Cognition जैसे विषय भी शामिल हैं।

संगीत, भावना और मानव मस्तिष्क

संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि इसका संबंध मानव भावना, स्मृति और संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं से भी है। इसी कारण Music and Mental Health, Music Therapy, Music and Neuroscience तथा Music Perception जैसे क्षेत्र भी FRSM के व्यापक शोध दायरे में आते हैं। सिम्पोजियम में यह चर्चा भी महत्वपूर्ण होगी कि संगीत और ध्वनि का इस्तेमाल शिक्षा, चिकित्सा, पुनर्वास और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े क्षेत्रों में किस तरह किया जा सकता है। FRSM के आधिकारिक शोध क्षेत्रों में संगीत चिकित्सा, मानसिक स्वास्थ्य, शिक्षा, दर्द और भावनात्मक अनुभवों से जुड़े अनुप्रयोग भी शामिल किए गए हैं। “BIT Mesra FRSM 2026″

शिक्षा और चिकित्सा में ध्वनि तकनीक

FRSM 2026 का एक महत्वपूर्ण पक्ष मानव-केंद्रित तकनीक है। इसका अर्थ ऐसी तकनीकों से है जिनका विकास केवल मशीन की क्षमता बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि मनुष्य की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाए। स्पीच और म्यूजिक आधारित तकनीकें शिक्षा, स्पीच थेरेपी, संचार सहायता, चिकित्सा और सीखने की प्रक्रिया में उपयोगी हो सकती हैं। FRSM के शोध विषयों में स्पीच ट्रेनिंग, थेरेपी, कम्युनिकेशन एड्स, शिक्षा और मेडिकल प्रैक्टिस में स्पीच एवं म्यूजिक के अनुप्रयोगों को भी शामिल किया गया है। “BIT Mesra FRSM 2026″

तीन दशक से अधिक पुरानी FRSM परंपरा

Frontiers of Research in Speech and Music की शुरुआत 1990 में हुई थी और तब से यह आयोजन स्पीच, म्यूजिक, फिजिक्स, गणित, म्यूजिकोलॉजी, स्पीच साइंस, भाषाविज्ञान, इलेक्ट्रॉनिक्स और कंप्यूटर साइंस जैसे विभिन्न क्षेत्रों के शोधकर्ताओं को एक मंच पर लाता रहा है। FRSM के 2025 संस्करण का आयोजन मैसूर स्थित All India Institute of Speech and Hearing में हुआ था, जहां इसकी थीम स्पीच-हियरिंग सिस्टम और म्यूजिक कॉग्निशन में AI रिसर्च पर केंद्रित थी।

30वें संस्करण में और व्यापक हुआ दायरा

FRSM का 30वां संस्करण इस लंबी शोध परंपरा को आगे बढ़ाते हुए स्पीच और म्यूजिक को मानव-केंद्रित तकनीकों से जोड़ रहा है। पिछले संस्करणों में स्पीच-म्यूजिक सिग्नल प्रोसेसिंग, भाषाविज्ञान, स्पीच डिसऑर्डर, संगीत मनोविज्ञान और न्यूरोकॉग्निशन जैसे विषयों पर शोध सामने आया है। FRSM 2024 की प्रकाशित कार्यवाही में स्पीच और म्यूजिक सिग्नल प्रोसेसिंग, स्पीच-लैंग्वेज पैथोलॉजी, भाषाई विविधता, भावनात्मक विश्लेषण और न्यूरोकॉग्निशन जैसे विषयों पर शोध शामिल था।

देश-विदेश के विशेषज्ञ होंगे शामिल

FRSM 2026 में भारत और विदेश के कई प्रमुख संस्थानों से विशेषज्ञों की भागीदारी होगी। अमेरिका की St. John’s University की डॉ. स्मिता गुहा मुख्य अतिथि होंगी, जबकि IIT Bombay की प्रो. प्रीति राव सम्मानित अतिथि के रूप में शामिल होंगी। आमंत्रित वक्ताओं में Queen Mary University of London के प्रो. मार्कस पियर्स, Birmingham City University के डॉ. आशुतोष कर, Tonic Sonic के संस्थापक निदेशक संज हॉल, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रो. उमर फारूक, RIMS के डॉ. एस. बी. सिंह और रवींद्र भारती विश्वविद्यालय, कोलकाता की अतिथि फैकल्टी गीताश्री मजूमदार शामिल हैं। इन विशेषज्ञों की भागीदारी से वैज्ञानिक शोध, संगीत, ध्वनि, तकनीक और चिकित्सा के अलग-अलग दृष्टिकोण एक मंच पर आने की उम्मीद है।

छात्रों और शोधार्थियों के लिए बड़ा अवसर

FRSM 2026 केवल विशेषज्ञों के बीच विचार-विमर्श तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि छात्रों और शोधार्थियों के लिए भी महत्वपूर्ण मंच बनेगा। ऐसे अंतरविषयक आयोजन में युवा शोधकर्ताओं को गणित, AI, कंप्यूटर साइंस, संगीत, भाषाविज्ञान, ध्वनि विज्ञान और चिकित्सा जैसे अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों से सीधे संवाद करने का अवसर मिलता है। इससे शोध के नए विचार विकसित होने, सहयोग की संभावनाएं बनने और भविष्य की पढ़ाई तथा रिसर्च के लिए नए रास्ते तलाशने में मदद मिल सकती है।

बीआईटी मेसरा के लिए भी महत्वपूर्ण आयोजन

बीआईटी मेसरा लंबे समय से विज्ञान, तकनीक और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में शोध को बढ़ावा देने वाला संस्थान रहा है। ऐसे में FRSM 2026 जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजन की मेजबानी संस्थान के लिए भी महत्वपूर्ण है। खास तौर पर गणित विभाग और जादवपुर विश्वविद्यालय के सर सी. वी. रमन सेंटर फॉर फिजिक्स एंड म्यूजिक का यह संयुक्त आयोजन गणित, ध्वनि विज्ञान, संगीत और आधुनिक तकनीक के बीच अंतर्विषयक शोध को सामने लाता है। आयोजन दस्तावेज के अनुसार बीआईटी मेसरा का गणित विभाग गणितीय और कम्प्यूटेशनल मॉडलिंग से जुड़े शोध को बढ़ावा देने के साथ इस सिम्पोजियम की मेजबानी कर रहा है।

आयोजन टीम की अहम भूमिका

FRSM 2026 का संयोजन गणित विभाग के प्रो. सौभिक चक्रवर्ती कर रहे हैं। डॉ. अनिंदिता बेरा और डॉ. पवन कुमार शॉ सह-संयोजक के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग के डॉ. सितांशु शेखर साहू आयोजन सचिव हैं। गणित विभाग के डॉ. अभिनव चक्रवर्ती और डॉ. अयन चंदा सह-आयोजन सचिव के रूप में कार्य कर रहे हैं। मीडिया सेल से आर. पी. मिश्रा और डॉ. मृणाल कुमार पाठक भी आयोजन की व्यवस्थाओं और संचार से जुड़े कार्यों में सहयोग कर रहे हैं।

रांची में शोध और तकनीक का बड़ा मंच

21 और 22 अगस्त को होने वाला FRSM 2026 रांची को स्पीच, म्यूजिक और ध्वनि तकनीक से जुड़े अंतरराष्ट्रीय शोध के एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में सामने लाएगा। इस आयोजन की खासियत यह है कि इसमें केवल एक विषय की विशेषज्ञता तक सीमित रहने के बजाय गणित, AI, कंप्यूटिंग, भाषाविज्ञान, संगीत, ध्वनि विज्ञान, चिकित्सा और मानव अनुभव को एक साथ देखने का प्रयास किया जा रहा है। आने वाले समय में जब AI और वॉयस टेक्नोलॉजी इंसानी जीवन के और अधिक हिस्से में प्रवेश करेंगी, तब ऐसे अंतरविषयक शोध मंच तकनीक को अधिक उपयोगी, समावेशी और मानव-केंद्रित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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