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24/10/2026 1:42 pm

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Healthy Food-बच्चों को हेल्दी खाना क्यों पसंद नहीं आता?

हैदराबाद स्थित भारतीय राष्ट्रीय पोषण संस्थान

क्या आपने कभी सोचा है कि बच्चे घर में बने पौष्टिक दलिये से मुंह फेर लेते हैं, लेकिन इंटरनेट पर दिखने वाले बर्गर, पिज्जा और रंग-बिरंगे पकवान उन्हें तुरंत आकर्षित करते हैं? हैदराबाद स्थित भारतीय राष्ट्रीय पोषण संस्थान के वैज्ञानिकों ने इसी सवाल को समझने के लिए एक दिलचस्प अध्ययन किया। शोध में 13 से 19 वर्ष की आयु के 203 किशोरों को भोजन की अलग-अलग तस्वीरें दिखाई गईं। नतीजों से संकेत मिला कि यदि बाजरे का दलिया, चने का सलाद, फल और दूसरे पौष्टिक खाद्य पदार्थ आकर्षक तरीके से प्रस्तुत किए जाएं, तो किशोरों में उन्हें खाने की इच्छा बढ़ सकती है। यह खोज भोजन की तस्वीरों के जरिए स्वस्थ खानपान को बढ़ावा देने की नई संभावना सामने रखती है। “Healthy Food”

आखिर स्वाद से पहले तस्वीर क्यों खींच लेती है हमारा ध्यान?

आज भोजन केवल भूख मिटाने का साधन नहीं रह गया है। सामाजिक माध्यमों पर भोजन की तस्वीरें देखना, नए पकवानों के वीडियो देखना और दूसरों को अलग-अलग व्यंजन खाते हुए देखना भी रोजमर्रा के डिजिटल जीवन का हिस्सा बन गया है। किसी तस्वीर में पिघलता पनीर, चमकती चटनी, करीने से सजाई गई सब्जियां या रंगीन फल दिखाई देते हैं, तो वह हमारा ध्यान खींच सकते हैं। इसके विपरीत, घर में बना साधारण भोजन पौष्टिक होने के बावजूद तस्वीर में उतना आकर्षक नहीं दिखता। इसका अर्थ यह नहीं कि सुंदर दिखने वाला भोजन हमेशा बेहतर होता है। बात इतनी है कि किसी व्यंजन को देखकर पैदा होने वाली पहली पसंद और उसे खाने के बाद मिलने वाले वास्तविक पोषण में अंतर होता है। इसी अंतर को समझना भोजन के प्रति हमारी पसंद को प्रभावित करने वाली मनोवैज्ञानिक प्रक्रियाओं को समझने की शुरुआत है। “Healthy Food”

भारतीय वैज्ञानिकों ने भोजन की तस्वीरों पर क्यों किया शोध?

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय पोषण संस्थान, हैदराबाद के वैज्ञानिकों ने यह जानने की कोशिश की कि जिस आकर्षक प्रस्तुति का इस्तेमाल आमतौर पर लोकप्रिय और कम पौष्टिक खाद्य पदार्थों को दिखाने के लिए किया जाता है, क्या उसका उपयोग पौष्टिक भोजन को लोकप्रिय बनाने में भी हो सकता है। इस अध्ययन का शीर्षक है Foodporn for e-Priming Healthy Food Choices Among Adolescents: An Experimental Study Using Appealing Food Imagery। इसके निष्कर्ष वर्ष 2026 में BMC Public Health पत्रिका में प्रकाशित हुए। अध्ययन का मुख्य विचार यह था कि यदि किशोरों के सामने पौष्टिक भोजन को सुंदर और स्वादिष्ट दिखने वाली तस्वीरों के रूप में रखा जाए, तो क्या वे उसे खाने के लिए अधिक इच्छुक होंगे। यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि भोजन संबंधी आदतें केवल पोषण की जानकारी से नहीं, बल्कि पसंद, अनुभव, सामाजिक वातावरण और भोजन की उपलब्धता से भी प्रभावित होती हैं।  “Healthy Food”

150 तस्वीरों से शुरू हुआ प्रयोग

शोधकर्ताओं ने सबसे पहले स्वस्थ और कम पौष्टिक माने जाने वाले खाद्य पदार्थों की 150 तस्वीरों का संग्रह तैयार किया। इसके बाद 43 स्कूली किशोरों से इन तस्वीरों को देखकर अपनी पसंद बताने के लिए कहा गया। उनकी प्रतिक्रियाओं के आधार पर मुख्य अध्ययन के लिए 15 तस्वीरें चुनी गईं। इनमें फल, मोटे अनाज, दालें, दूध से बने खाद्य पदार्थ, मेवे और बीज जैसे पौष्टिक विकल्प शामिल थे। कुछ खाद्य पदार्थ साधारण रूप में दिखाए गए, जबकि कुछ को अधिक आकर्षक ढंग से सजाकर प्रस्तुत किया गया। इसके बाद शोधकर्ताओं ने यह देखने की कोशिश की कि तस्वीरों की प्रस्तुति बदलने से किशोरों की पसंद और उन्हें खाने की इच्छा में क्या अंतर आता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य केवल सुंदर तस्वीर बनाना नहीं था, बल्कि यह समझना था कि भोजन का दृश्य रूप उसकी स्वीकार्यता को किस हद तक प्रभावित कर सकता है।  “Healthy Food”

203 किशोरों को 15 दिनों तक दिखाई गईं तस्वीरें

मुख्य अध्ययन में भारत के अलग-अलग हिस्सों के 203 किशोर शामिल थे, जिनकी आयु 13 से 19 वर्ष के बीच थी। चुनी गई तस्वीरें 15 दिनों तक इंस्टाग्राम के माध्यम से प्रतिभागियों के सामने रखी गईं। इसमें तीन प्रकार की प्रस्तुतियों की तुलना की गई। पहली श्रेणी में कम पौष्टिक खाद्य पदार्थों को आकर्षक रूप में दिखाया गया। दूसरी श्रेणी में पौष्टिक भोजन को सुंदर और लुभावने ढंग से प्रस्तुत किया गया। तीसरी श्रेणी में पौष्टिक भोजन की साधारण तस्वीरें थीं। शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों की प्रतिक्रियाओं और भोजन खाने की इच्छा को समझने के लिए प्रश्नावली का उपयोग किया। इसके अलावा, 19 किशोरों से विस्तार से बातचीत भी की गई, ताकि यह जाना जा सके कि तस्वीरों में उन्हें क्या पसंद आया और भोजन को लेकर उनकी सोच में कोई बदलाव महसूस हुआ या नहीं।

बाजरे के दलिये की सुंदर तस्वीर ने खींचा ध्यान

इस अध्ययन के महत्वपूर्ण निष्कर्षों में बाजरे के दलिये की आकर्षक तस्वीर शामिल थी। सामान्य रूप में दिखाए गए अनाज के मुकाबले सुंदर तरीके से सजाकर प्रस्तुत किए गए दलिये ने किशोरों में उसे खाने की इच्छा के लिहाज से बेहतर प्रतिक्रिया हासिल की। यह अंतर मोटे अनाज की श्रेणी में सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण पाया गया। इसका एक व्यावहारिक संदेश है। अक्सर घरों में दलिया या मोटे अनाज को केवल साधारण भोजन की तरह परोसा जाता है, जबकि उन्हें स्वाद और रूप के लिहाज से अधिक आकर्षक बनाया जा सकता है। उदाहरण के लिए, दलिये को उचित गाढ़ेपन में पकाकर, ऊपर से थोड़े मेवे या मौसमी फल डालकर और साफ कटोरे में करीने से परोसकर उसकी प्रस्तुति बेहतर की जा सकती है। हालांकि यह सुझाव भोजन को अधिक आकर्षक बनाने के लिए है, न कि यह दावा करने के लिए कि केवल सजावट से उसके पोषण गुण बढ़ जाते हैं।  “Healthy Food”

चने के सलाद ने भी दिखाई पसंद बदलने की संभावना

शोध में चने के सलाद की प्रस्तुति से भी महत्वपूर्ण संकेत मिले। साधारण तरीके से दिखाए गए दाल या चने के विकल्पों की तुलना में आकर्षक ढंग से सजाए गए चने के सलाद ने किशोरों की रुचि बढ़ाई। प्रतिभागियों ने भोजन की तस्वीरों में रंग, बनावट, आकार, चमक, सामग्री और सजावट को महत्वपूर्ण बताया। इससे पता चलता है कि पौष्टिक भोजन को प्रस्तुत करने का तरीका उसकी पहली छाप को प्रभावित कर सकता है। भारतीय भोजन में चना, मूंग, अंकुरित अनाज, फल और सब्जियां पहले से उपलब्ध हैं। इन्हें अलग-अलग रंगों और बनावट के साथ संतुलित ढंग से परोसना भोजन को देखने में दिलचस्प बना सकता है। लेकिन वास्तविक भोजन में स्वाद, स्वच्छता, उचित मात्रा और पौष्टिकता भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। केवल तस्वीर में अच्छा दिखना यह सुनिश्चित नहीं करता कि व्यंजन हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त या पौष्टिक होगा। “Healthy Food”

कौन-सी बातें भोजन को अधिक आकर्षक बनाती हैं?

शोध में किशोरों ने बताया कि भोजन के रंग, बनावट, आकार, चमक और उसे सजाने का तरीका उनकी पसंद को प्रभावित करते हैं। तस्वीर में अलग-अलग रंगों का संतुलन, सामग्री की स्पष्टता और भोजन का करीने से रखा जाना भी ध्यान खींच सकता है। उदाहरण के लिए, हरे खीरे, लाल टमाटर, उबले चने और हरी पत्तियों से बना सलाद तस्वीर में रंगों का अच्छा मेल दिखा सकता है। इसी तरह फल को काटने का तरीका या दलिये को सुंदर कटोरे में परोसना उसे अधिक आकर्षक बना सकता है। इन बातों को घर की रसोई में अपनाने के लिए महंगे उपकरणों या होटल जैसी व्यवस्था की जरूरत नहीं है। फिर भी हर व्यक्ति की पसंद अलग होती है। किसी किशोर को रंगीन सलाद पसंद आ सकता है, जबकि दूसरे को साधारण दाल-चावल अधिक अच्छा लगे। इसलिए प्रस्तुति को विकल्प बढ़ाने का तरीका समझना चाहिए, किसी एक तरह के भोजन को सभी पर थोपने का नहीं।  “Healthy Food”

क्या पोषण की जानकारी लिखने से ज्यादा असर तस्वीर का होता है?

अध्ययन का एक दिलचस्प पहलू यह था कि कुछ प्रतिभागियों को तस्वीरों के साथ भोजन के पोषण संबंधी छोटे विवरण भी दिए गए, जबकि दूसरे समूह ने केवल तस्वीरें देखीं। दोनों समूहों की प्रतिक्रियाओं में महत्वपूर्ण अंतर नहीं मिला। शोधकर्ताओं की रिपोर्ट के अनुसार, बातचीत के दौरान किशोरों ने अक्सर साथ लिखे विवरण के बजाय तस्वीर पर अधिक ध्यान देने की बात कही। इसका अर्थ यह नहीं कि पोषण संबंधी जानकारी बेकार है। इसका अर्थ केवल यह है कि इस अध्ययन में छोटे विवरण जोड़ने से तस्वीरों के प्रति प्रतिक्रिया में अतिरिक्त लाभ स्पष्ट नहीं हुआ। भोजन के बारे में सही जानकारी फिर भी जरूरी है, खासकर तब जब किसी खाद्य पदार्थ में एलर्जी पैदा करने वाले तत्व हों, चीनी या नमक अधिक हो या किसी विशेष स्वास्थ्य स्थिति में आहार संबंधी सावधानी आवश्यक हो। बेहतर तरीका यह हो सकता है कि आकर्षक तस्वीर के साथ संक्षिप्त, स्पष्ट और तथ्यपरक जानकारी भी दी जाए। क्या तस्वीर देखकर किशोरों ने वास्तव में भोजन खाना शुरू कर दिया?

शोधकर्ताओं से बातचीत के दौरान कुछ प्रतिभागियों ने बताया कि उन्होंने ऐसे खाद्य पदार्थ आजमाए जिन्हें वे पहले पसंद नहीं करते थे। कुछ ने फल और दालें अधिक खाने या घर पर भोजन को अलग तरीके से तैयार करने की कोशिश करने की बात भी कही। ये प्रतिक्रियाएं बताती हैं कि आकर्षक तस्वीरें केवल देखने के अनुभव तक सीमित नहीं रह सकतीं; वे कुछ लोगों में नया भोजन आजमाने की उत्सुकता भी पैदा कर सकती हैं। लेकिन यहां वैज्ञानिक सावधानी जरूरी है। अध्ययन का समय केवल 15 दिन था और भोजन की खपत से संबंधित कई प्रतिक्रियाएं प्रतिभागियों की स्वयं बताई गई जानकारी पर आधारित थीं। इससे यह निश्चित रूप से साबित नहीं होता कि तस्वीरें देखने से सभी किशोरों की खानपान की आदतें लंबे समय तक बदल गईं। इस संभावना को प्रमाणित करने के लिए बड़े समूहों में अधिक समय तक अध्ययन करना होगा और वास्तविक भोजन सेवन को अधिक विश्वसनीय तरीके से मापना होगा। “Healthy Food”

स्कूलों की भोजन व्यवस्था में कैसे काम आ सकता है यह विचार?

यदि किसी स्कूल की भोजन व्यवस्था में पौष्टिक विकल्प उपलब्ध हैं, लेकिन बच्चे उन्हें चुनने में कम रुचि दिखाते हैं, तो भोजन की प्रस्तुति पर ध्यान देना उपयोगी हो सकता है। उदाहरण के लिए, स्कूल की कैंटीन में मौसमी फल, चना सलाद, दाल से बने व्यंजन और मोटे अनाज के पकवान साफ-सुथरे तरीके से प्रदर्शित किए जा सकते हैं। मेनू में केवल खाद्य पदार्थ का नाम लिखने के बजाय उसकी वास्तविक तस्वीर भी दिखाई जा सकती है। लेकिन तस्वीरें तभी उपयोगी होंगी जब भोजन वास्तव में उपलब्ध हो, उचित कीमत पर मिले और स्वाद तथा स्वच्छता के लिहाज से स्वीकार्य हो। अगर आकर्षक तस्वीर देखकर बच्चा भोजन चुनता है, लेकिन परोसते समय उसे खराब गुणवत्ता या बेस्वाद पकवान मिलता है, तो उसका भरोसा कमजोर हो सकता है। इसलिए भोजन का दृश्य रूप, वास्तविक गुणवत्ता और बच्चों की पसंद एक साथ ध्यान में रखनी चाहिए। राष्ट्रीय पोषण संस्थान के शोधकर्ताओं ने भी सामाजिक माध्यमों, स्कूल कैंटीन, कैफे और दूसरे भोजन स्थलों में इस विचार की आगे जांच करने की संभावना बताई है।  “Healthy Food”

माता-पिता घर पर क्या कर सकते हैं?

घर में बच्चों को स्वस्थ भोजन के प्रति उत्साहित करने के लिए सबसे पहले उन्हें भोजन चुनने और तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, माता-पिता बच्चे से पूछ सकते हैं कि वह फल किस तरह काटकर खाना पसंद करेगा या सलाद में कौन-सी सब्जियां रखना चाहेगा। चना, दही, मौसमी फल, दाल और सब्जियों जैसे उपलब्ध विकल्पों को अलग-अलग तरीकों से परोसा जा सकता है। बच्चों को केवल यह कहकर भोजन खाने के लिए मजबूर करना कि वह उनके स्वास्थ्य के लिए अच्छा है, हर बार कारगर नहीं होता। इसके बजाय उन्हें भोजन की सामग्री पहचानने, स्वाद आजमाने और अपनी पसंद बताने का अवसर देना उपयोगी हो सकता है। साथ ही, घर में भोजन को लेकर सकारात्मक माहौल बनाए रखना जरूरी है। किसी बच्चे को उसके वजन या भोजन की पसंद के लिए शर्मिंदा करना उचित नहीं है। आकर्षक प्रस्तुति का उद्देश्य भोजन के प्रति जिज्ञासा बढ़ाना होना चाहिए, न कि बच्चों पर किसी खास शरीर या रूप का दबाव डालना।

क्या यह तरीका जंक फूड के विज्ञापनों का विकल्प बन सकता है?

इस शोध से संकेत मिलता है कि पौष्टिक भोजन की तस्वीरों को आकर्षक बनाकर स्वस्थ विकल्पों को बढ़ावा देने की संभावना तलाश की जा सकती है। लेकिन केवल तस्वीरें दिखाने से जंक फूड के विज्ञापनों का प्रभाव समाप्त हो जाएगा, ऐसा निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। बच्चों और किशोरों की भोजन संबंधी पसंद पर स्वाद, कीमत, उपलब्धता, दोस्तों का व्यवहार, परिवार की आदतें और विज्ञापन जैसे अनेक कारक असर डालते हैं। अगर पौष्टिक भोजन महंगा हो, आसानी से उपलब्ध न हो या बच्चे उसे पसंद न करें, तो केवल अच्छी तस्वीर पर्याप्त नहीं होगी। इसी तरह कम पौष्टिक खाद्य पदार्थों की आकर्षक प्रस्तुति भी उनकी वास्तविक पोषण गुणवत्ता नहीं बदलती। इसलिए स्वस्थ खानपान को बढ़ावा देने के लिए बेहतर तस्वीरों के साथ पौष्टिक विकल्पों की उपलब्धता, उचित कीमत, भोजन शिक्षा और परिवार तथा स्कूल का सहयोग भी जरूरी है।  “Healthy Food”

शोध की सीमाएं समझना क्यों जरूरी है?

इस अध्ययन की सबसे महत्वपूर्ण सीमा इसकी छोटी अवधि है। 203 किशोरों पर 15 दिनों तक तस्वीरें साझा करने से यह समझने में मदद मिल सकती है कि भोजन की प्रस्तुति उनकी तत्काल पसंद को कैसे प्रभावित करती है, लेकिन इससे जीवनभर की खानपान की आदतों के बारे में निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। प्रतिभागियों की स्वयं बताई गई प्रतिक्रियाओं में याददाश्त या अपनी आदतों को बेहतर बताने की प्रवृत्ति का असर भी संभव है। इसके अलावा, अलग-अलग राज्यों, सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमियों और भोजन की परंपराओं वाले किशोरों में परिणाम भिन्न हो सकते हैं। शोध में कुछ खाद्य श्रेणियों में स्पष्ट अंतर मिला, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि हर पौष्टिक भोजन की तस्वीर को सुंदर बनाने से हर व्यक्ति उसे खाने लगेगा। इसलिए इस खोज को भोजन संबंधी व्यवहार सुधारने की एक संभावित रणनीति मानना चाहिए, न कि स्वस्थ आहार की गारंटी।

पौष्टिक भोजन को सिर्फ स्वस्थ नहीं, आकर्षक भी बनाइए

हैदराबाद के राष्ट्रीय पोषण संस्थान के इस अध्ययन ने भोजन और मनोविज्ञान के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध की ओर ध्यान खींचा है। बाजरे के दलिये और चने के सलाद जैसे साधारण पौष्टिक विकल्पों को आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करने पर किशोरों में उन्हें खाने की इच्छा बढ़ने के संकेत मिले। इससे घरों, स्कूलों और सामाजिक माध्यमों पर पौष्टिक भोजन को अधिक दिलचस्प ढंग से पेश करने की संभावना सामने आती है। हालांकि लंबे समय तक खानपान की आदतों पर इसका कितना प्रभाव पड़ेगा, यह अभी और शोध से समझना होगा। स्वस्थ भोजन को बढ़ावा देने का सबसे अच्छा रास्ता केवल उसकी सुंदर तस्वीर बनाना नहीं, बल्कि उसे स्वादिष्ट, पौष्टिक, सुलभ और वास्तविक जीवन में आसानी से उपलब्ध बनाना है।

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