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14/09/2026 6:16 pm

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Jharkhand Teachers’ Demands: संयुक्त शिक्षक मोर्चा ने उठाई शिक्षक नियुक्ति, MACP और TET की मांग

Jharkhand Teachers’ Demands

शिक्षक हित के सवालों पर बड़ी बैठक, सरकार से त्वरित कार्रवाई की मांग

रांची में शिक्षा और शिक्षक हित से जुड़े मुद्दों को लेकर झारखंड प्रदेश संयुक्त शिक्षक मोर्चा ने एक बार फिर अपनी आवाज बुलंद की है। 14 सितंबर 2026 को धुर्वा स्थित भारतीय मजदूर संघ के कार्यालय में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में राज्य के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी, विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता, शिक्षकों की सेवा-सुविधाओं, वेतनमान, TET और गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में मोर्चा में शामिल पांचों शिक्षक संगठनों के प्रदेश और जिला पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक की अध्यक्षता प्रदेश संयोजक मंगलेश्वर उराँव ने की।

झारखंड में शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों से जुड़े मुद्दे पहले भी लगातार सार्वजनिक बहस का विषय रहे हैं। हाल के दिनों में शिक्षकों की सेवा-सुविधाओं, अनुदान, शिक्षक प्रशिक्षण, वेतन और TET से संबंधित विभिन्न मांगें सामने आती रही हैं। ऐसे माहौल में संयुक्त शिक्षक मोर्चा की यह बैठक राज्य की स्कूली शिक्षा व्यवस्था को लेकर शिक्षक संगठनों के बीच बढ़ती चिंता को सामने लाती है। “Jharkhand Teachers’ Demands”

एक शिक्षक के भरोसे विद्यालय चलने पर उठे सवाल

बैठक में मोर्चा के प्रदेश संयोजक अमीन अहमद और प्रदेश प्रवक्ता अरुण कुमार दास ने राज्य के हजारों विद्यालयों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उनका कहना है कि कई विद्यालयों में केवल एक शिक्षक के भरोसे पठन-पाठन संचालित हो रहा है। ऐसे विद्यालयों में विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती बन जाता है। मोर्चा ने सवाल उठाया कि यदि सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को अपनी प्राथमिकता मानती है, तो विद्यालयों में पर्याप्त संख्या में शिक्षक उपलब्ध कराने की दिशा में तेजी से कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है।

शिक्षकों की कमी का सीधा प्रभाव बच्चों की पढ़ाई पर पड़ने की बात शिक्षक संगठन लंबे समय से उठाते रहे हैं। ऐसे में मोर्चा का जोर केवल शिक्षकों की संख्या बढ़ाने पर नहीं बल्कि विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी है। संगठन का मानना है कि प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर से लेकर माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर तक विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए विषय के अनुरूप पर्याप्त शिक्षक होना जरूरी है। “Jharkhand Teachers’ Demands”

विषयवार शिक्षक और घंटी आधारित नियुक्ति की मांग

संयुक्त शिक्षक मोर्चा ने आवश्यकता वाले विद्यालयों में तत्काल प्रभाव से वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग भी रखी है। मोर्चा का कहना है कि जहां स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया में समय लग रहा है, वहां तत्काल व्यवस्था के रूप में घंटी आधारित शिक्षकों की नियुक्ति की जा सकती है। इससे उन विद्यालयों में पढ़ाई प्रभावित होने से बचाई जा सकेगी जहां किसी खास विषय के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं।

मोर्चा का मानना है कि शिक्षक केवल कक्षा में पढ़ाने की जिम्मेदारी तक सीमित रहें तो सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। संगठन ने शिक्षकों को विभिन्न गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त करने की मांग करते हुए कहा कि शिक्षकों का मुख्य दायित्व विद्यार्थियों को पढ़ाना और उनकी शैक्षणिक क्षमता का विकास करना है। इस मांग को शिक्षक संगठनों की लंबे समय से चली आ रही प्रमुख चिंताओं में से एक माना जा सकता है। “Jharkhand Teachers’ Demands”

MACP और उत्क्रमित वेतनमान का मुद्दा भी प्रमुख

बैठक में शिक्षकों की सेवा-सुविधाओं और आर्थिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया गया। संयुक्त शिक्षक मोर्चा ने राज्य के अन्य कर्मचारियों और कल्याण विभाग के शिक्षकों की तर्ज पर शिक्षकों को MACP का लाभ देने की मांग की। इसके साथ ही छठे वेतन आयोग की अनुशंसा के अनुरूप उत्क्रमित वेतनमान लागू करने की मांग भी रखी गई।

शिक्षकों की सेवा-सुविधाओं से जुड़े MACP और वेतनमान के मुद्दे पहले भी संयुक्त शिक्षक मोर्चा की बैठकों में उठ चुके हैं। अगस्त 2026 में भी मोर्चे से जुड़ी मांगों में MACP और वेतनमान को प्रमुखता से शामिल किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। इससे स्पष्ट है कि इन मांगों को शिक्षक संगठन लंबे समय से लंबित विषय के रूप में देख रहे हैं। “Jharkhand Teachers’ Demands”

2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए विशेष TET की मांग

शिक्षक मोर्चा ने वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप विशेष TET परीक्षा आयोजित करने की मांग भी उठाई। TET यानी Teacher Eligibility Test से जुड़ा मुद्दा झारखंड में लगातार चर्चा में रहा है। राज्य में 2026 की शिक्षक पात्रता परीक्षा के संबंध में झारखंड अधिविद्य परिषद की ओर से विज्ञप्ति भी जारी की गई है।

मोर्चा का तर्क है कि पुराने शिक्षकों से संबंधित पात्रता के मुद्दे का समाधान स्पष्ट और व्यावहारिक तरीके से किया जाना चाहिए, ताकि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के सामने अनिश्चितता की स्थिति समाप्त हो। संगठन ने सरकार से इस विषय पर आवश्यक प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है। “Jharkhand Teachers’ Demands”

विद्यालय विकास राशि और कुकिंग कॉस्ट में वृद्धि की मांग

बैठक में विद्यालयों के संचालन से जुड़े वित्तीय विषयों पर भी चर्चा हुई। मोर्चा ने पिछले वर्ष से लंबित विद्यालय विकास राशि और कुकिंग कॉस्ट का भुगतान जल्द से जल्द करने की मांग की। संगठन का कहना है कि बाजार में वस्तुओं की कीमतों में लगातार बदलाव को देखते हुए विद्यालयों को उपलब्ध कराई जाने वाली राशि में भी उसी के अनुरूप वृद्धि की आवश्यकता है।

सरकारी विद्यालयों में बच्चों को उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं और योजनाओं का प्रभावी संचालन पर्याप्त वित्तीय संसाधनों पर निर्भर करता है। ऐसे में विद्यालय विकास राशि और मध्याह्न भोजन से संबंधित खर्च के लिए उपलब्ध राशि को समय के अनुरूप बनाए रखना स्कूल प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण माना जा सकता है। “Jharkhand Teachers’ Demands”

वित्तीय और सामाजिक अंकेक्षण को लेकर भी मोर्चा ने जताई चिंता

संयुक्त शिक्षक मोर्चा ने विद्यालयों के वित्तीय एवं सामाजिक अंकेक्षण की प्रक्रिया के दौरान शिक्षकों पर कथित आर्थिक दबाव बनाए जाने का आरोप लगाते हुए इस पर रोक लगाने की मांग की। संगठन का कहना है कि ऑडिट और पारदर्शिता की प्रक्रिया जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर शिक्षकों को भय या दबाव की स्थिति में नहीं रखा जाना चाहिए।

शिक्षा व्यवस्था में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ-साथ शिक्षकों के प्रति प्रशासनिक व्यवहार भी महत्वपूर्ण विषय है। झारखंड के स्कूल शिक्षा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी सामाजिक अंकेक्षण, निगरानी और जवाबदेही को शिक्षा व्यवस्था की प्रमुख प्रक्रियाओं में शामिल किया गया है। ऐसे में मोर्चा की मांग का केंद्र यह है कि निगरानी व्यवस्था पारदर्शी हो और शिक्षकों को अनावश्यक दबाव का सामना न करना पड़े।

शिक्षा विभाग में नेतृत्व और मंत्री पद को लेकर मोर्चा की मांग

बैठक में मोर्चा ने शिक्षा विभाग के नेतृत्व से संबंधित विषय भी उठाया। संगठन की ओर से स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग में लंबे समय से मंत्री पद रिक्त होने का दावा करते हुए योग्य मंत्री की नियुक्ति की मांग की गई। हालांकि, सरकारी रिकॉर्ड में वर्तमान में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग का मंत्री दिखाया गया है। इसलिए इस हिस्से को मोर्चा के दावे और मांग के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि विभाग में मंत्री पद के रिक्त होने की स्वतंत्र पुष्टि के रूप में।

मोर्चा का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े फैसलों को गति देने के लिए विभागीय स्तर पर प्रभावी नेतृत्व आवश्यक है। संगठन ने शिक्षा व्यवस्था की समस्याओं के समाधान के लिए सरकार से त्वरित और ठोस पहल की मांग की है। “Jharkhand Teachers’ Demands”

अक्टूबर में रांची में होगी बड़ी शिक्षक संगोष्ठी

बैठक में सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक आगामी अक्टूबर में रांची में राज्यस्तरीय शिक्षक संगोष्ठी आयोजित करने का रहा। मोर्चा के अनुसार इस संगोष्ठी में राज्यभर से सैकड़ों शिक्षक शामिल होंगे और शिक्षा एवं शिक्षक हित से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर व्यापक चर्चा की जाएगी।

यह संगोष्ठी ऐसे समय में प्रस्तावित है जब झारखंड में शिक्षक संगठनों की ओर से वेतन, अनुदान, प्रशिक्षण, शिक्षक नियुक्ति और सेवा-सुविधाओं से संबंधित अलग-अलग मांगें सामने आ रही हैं। सितंबर की शुरुआत में भी राज्य के करीब 10 हजार शिक्षकों और कर्मचारियों ने अनुदान वृद्धि सहित विभिन्न मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। ऐसे में अक्टूबर की प्रस्तावित संगोष्ठी शिक्षक संगठनों के लिए अपनी मांगों को एक साझा मंच पर रखने का अवसर बन सकती है। “Jharkhand Teachers’ Demands”

शिक्षक हित के साथ सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता पर जोर

संयुक्त शिक्षक मोर्चा की बैठक में उठाए गए मुद्दों को केवल शिक्षकों की सेवा-सुविधाओं तक सीमित नहीं किया गया। मोर्चा ने शिक्षक उपलब्धता और गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति जैसे विषयों को सीधे विद्यार्थियों की पढ़ाई और सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता से जोड़ते हुए सरकार से कार्रवाई की मांग की।

संगठन का तर्क है कि यदि पर्याप्त संख्या में शिक्षक विद्यालयों में उपलब्ध हों, विषयवार शिक्षकों की कमी दूर की जाए और शिक्षकों को पठन-पाठन के लिए पर्याप्त समय मिले, तो सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सकता है। यही वजह है कि शिक्षक नियुक्ति, Jharkhand TET, Teacher Recruitment, MACP for Teachers, Teacher Salary और Government School Education जैसे विषय वर्तमान शिक्षा बहस में महत्वपूर्ण बने हुए हैं।

शिक्षा और शिक्षक हित पर आगे बढ़ेगा आंदोलन

बैठक में प्रदेश और जिला स्तर के बड़ी संख्या में शिक्षक प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे। इनमें विजय बहादुर सिंह, अमीन अहमद, मंगलेश्वर उराँव, डॉ. सुधांशु कुमार सिंह, अरुण कुमार दास, मुमताज अहमद, अंजय अग्रवाल, संजय कुमार राय, रामकुमार साहू, जीवन नाथ तिवारी, सुभाष कुमार, लक्ष्मी नारायण तिवारी, राम कुमार झा, धर्मदेव प्रसाद, गणेश चंद्र शुक्ला, पंकज कुमार और राकेश कुमार श्रीवास्तव सहित विभिन्न जिलों के प्रतिनिधि शामिल रहे।

बैठक से यह संकेत मिला कि संयुक्त शिक्षक मोर्चा आने वाले समय में शिक्षा और शिक्षक हित के मुद्दों को अधिक व्यापक मंच पर उठाने की तैयारी में है। अक्टूबर में प्रस्तावित राज्यस्तरीय शिक्षक संगोष्ठी इस अभियान का अगला बड़ा पड़ाव होगी, जहां शिक्षक नियुक्ति, JTET/TET, वेतनमान, MACP, विद्यालयों में शिक्षक कमी और शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त करने जैसे मुद्दों पर सरकार के समक्ष अपनी बात मजबूती से रखने की तैयारी है।

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