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04/11/2026 7:16 pm

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Shrimad Bhagwat Katha-श्री राधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर में उमड़ा श्रद्धासागर

Shrimad Bhagwat Katha

रांची। पुंदाग स्थित श्री राधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर में श्री राधाष्टमी महोत्सव के अवसर पर आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा के दौरान ध्रुव चरित्र, जड़ भरत, भारतवर्ष की महिमा और अजामिल प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया गया। वृंदावन की सुप्रसिद्ध कथा वाचिका साध्वी गोपिका जी ने व्यास पीठ से भगवान के नाम-स्मरण, सत्संग और भक्ति के महत्व को समझाया। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में पहुंचे और पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। “Shrimad Bhagwat Katha”

ध्रुव चरित्र ने दिया दृढ़ संकल्प और भक्ति का संदेश

सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन साध्वी गोपिका जी ने सबसे पहले ध्रुव चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि बालक ध्रुव के जीवन में परिस्थितियां अनुकूल नहीं थीं, लेकिन उन्होंने अपने अपमान और कठिनाइयों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। दृढ़ संकल्प, कठोर तपस्या और भगवान श्रीहरि के प्रति अटूट भक्ति के माध्यम से उन्होंने परम पद प्राप्त किया।

साध्वी गोपिका जी ने कहा कि ध्रुव का जीवन आज भी मनुष्य को यह प्रेरणा देता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मन में दृढ़ विश्वास हो तो व्यक्ति अपने जीवन की दिशा बदल सकता है। ध्रुव चरित्र केवल धार्मिक कथा नहीं बल्कि संकल्प, तपस्या, धैर्य और ईश्वर के प्रति समर्पण का संदेश भी देता है। “Shrimad Bhagwat Katha”

जड़ भरत प्रसंग में मोह-माया से सावधान रहने की सीख

कथा के अगले प्रसंग में साध्वी गोपिका जी ने जड़ भरत की कथा का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि मनुष्य सांसारिक जीवन में रहते हुए अनेक प्रकार के मोह और आसक्ति में बंध जाता है। यही मोह कई बार व्यक्ति को उसके वास्तविक आध्यात्मिक लक्ष्य से दूर कर देता है।

जड़ भरत प्रसंग के माध्यम से उन्होंने श्रद्धालुओं को समझाया कि मनुष्य को संसार के दायित्वों का निर्वहन करते हुए भी परमात्मा की प्राप्ति को अपने जीवन का अंतिम लक्ष्य मानना चाहिए। भौतिक सुख-सुविधाएं जीवन का हिस्सा हो सकती हैं, लेकिन मनुष्य को अपनी आध्यात्मिक चेतना और ईश्वर के प्रति समर्पण को नहीं भूलना चाहिए। “Shrimad Bhagwat Katha”

भारतवर्ष की महिमा का हुआ भावपूर्ण वर्णन

साध्वी गोपिका जी ने कथा के दौरान भारतवर्ष की महिमा का भी विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भारत की धरती ऋषियों, संतों, तपस्वियों और भक्तों की तपोभूमि रही है। इस भूमि की आध्यात्मिक परंपरा ने सदियों से पूरी दुनिया को धर्म, सत्य, सेवा, तपस्या और मानव कल्याण का संदेश दिया है।

उन्होंने मानव जीवन को अत्यंत दुर्लभ बताते हुए कहा कि मनुष्य को अपने जीवन का उपयोग केवल भौतिक उपलब्धियों के लिए नहीं बल्कि धर्म, सत्कर्म, सेवा और भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए भी करना चाहिए। कथा के इस प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और सनातन मूल्यों से जोड़ने का काम किया। “Shrimad Bhagwat Katha”

अजामिल प्रसंग ने समझाई नाम-स्मरण की महिमा

कथा के तीसरे दिन अजामिल प्रसंग विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। साध्वी गोपिका जी ने भगवान के नाम-स्मरण की महिमा बताते हुए कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में सदाचार और भक्ति के मार्ग पर चलने का प्रयास करना चाहिए। अजामिल प्रसंग के माध्यम से उन्होंने भगवान के नाम और सत्संग की आध्यात्मिक महत्ता को समझाया।

उन्होंने कहा कि भगवान का स्मरण और सत्संग मनुष्य के जीवन में आध्यात्मिक चेतना का संचार करते हैं। कथा के इन प्रसंगों का उद्देश्य श्रद्धालुओं को अपने जीवन में सकारात्मकता, सदाचार, भक्ति और आत्मचिंतन की भावना विकसित करने के लिए प्रेरित करना रहा। “Shrimad Bhagwat Katha”

राधा-कृष्ण के भजनों पर झूम उठे श्रद्धालु

कथा के दौरान साध्वी गोपिका जी ने श्री राधा रानी और श्रीकृष्ण के सुमधुर भजनों की प्रस्तुति भी दी। भक्ति गीतों की मधुर धुन और भावपूर्ण प्रस्तुति के बीच श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भजनों पर झूमते हुए भगवान का स्मरण किया और पूरा मंदिर परिसर राधे-राधे तथा श्रीकृष्ण के जयघोष से गूंज उठा।

इस दौरान श्री राधा रानी श्यामा जी का मोतियों से जड़ित आभूषणों से मनोहारी श्रृंगार किया गया। श्रृंगार के बाद मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया। धार्मिक वातावरण, भजन और कथा के कारण पूरे मंदिर परिसर में भक्ति की विशेष अनुभूति देखने को मिली। “Shrimad Bhagwat Katha”

कथा से पहले साध्वी गोपिका जी ने की गौसेवा

कथा प्रारंभ होने से पहले साध्वी गोपिका जी ने कृष्ण प्रणामी महिला समिति के सदस्यों के साथ मंदिर परिसर स्थित प्रणामी गौ सेवा धाम पहुंचकर गौसेवा की। उन्होंने गायों को गुड़-रोटी और चारा खिलाया तथा गौसेवा के महत्व पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि सेवा भारतीय आध्यात्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है और गौसेवा को भी इसी सेवा भाव से देखा जाता है। गौसेवा के बाद साध्वी गोपिका जी कथा स्थल पहुंचीं, जहां श्रद्धालुओं ने उनका स्वागत किया और कथा का शुभारंभ हुआ। “Shrimad Bhagwat Katha”

सामूहिक आरती और प्रसाद वितरण से हुआ समापन

कथा के समापन पर मंदिर परिसर में सामूहिक आरती की गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने आरती में हिस्सा लिया और भगवान श्री राधा-कृष्ण से सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की। इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।

कथा के आयोजन को लेकर मंदिर परिसर में पूरे दिन धार्मिक उत्साह का वातावरण बना रहा। बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और अन्य श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंचे।

चौथे दिन सुनाए जाएंगे प्रह्लाद और श्रीकृष्ण प्राकट्य के प्रसंग

ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन प्रह्लाद चरित्र, समुद्र मंथन, वामन अवतार, श्रीराम अवतार, श्रीकृष्ण प्राकट्य और नंदोत्सव जैसे महत्वपूर्ण प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। कथा प्रतिदिन अपराह्न 2:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक आयोजित की जा रही है।

उन्होंने श्रद्धालुओं से कथा में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर भगवान की कथा का श्रवण करने और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने का आग्रह किया।

बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की रही मौजूदगी

श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में डूंगरमल अग्रवाल, विजय अग्रवाल, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, निर्मल जालान, पूरणमल सर्राफ, सुरेश अग्रवाल, मधुसूदन जाजोदिया, नंदकिशोर चौधरी, अरविंद अग्रवाल, शिव भगवान अग्रवाल, अंजनी अग्रवाल, विशाल जालान, पुजारी अरविंद पांडेय, मनीष सोनी, विष्णु सोनी, पवन अग्रवाल, सुरेश भगत, ज्ञान प्रकाश शर्मा, पवन पोद्दार, संजय सर्राफ सहित अनेक लोग मौजूद रहे।

इसके अलावा विद्या देवी अग्रवाल, उर्मिला पाड़िया, सुनीता अग्रवाल, संतोष देवी अग्रवाल, शीला मुरारका, शकुंतला केजरीवाल, सरिता अग्रवाल, सुमन चौधरी, आशा मुंजाल, रामादेवी डोकानिया, अमिता जालान, दीपिका मोतीका, नीलम गोयल, नंद रानी पाठक, आशा सिंह, उषा देवी, ललिता पोद्दार, किरण पोद्दार, ललिता अग्रवाल, भगवती देवी, लाल देवी, सुनीता देवी, आशा मिश्रा, किरण बरनवाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु, महिलाएं एवं पुरुष उपस्थित रहे।

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