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14/09/2026 10:28 am

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मोटिवेशन
Intentional Boredom

Intentional Boredom-क्या बोर होना भी है दिमाग के लिए ज़रूरी?

कुछ दशक पहले तक बस का इंतज़ार करना, ट्रेन की खिड़की से बाहर देखना, छत पर बैठकर आसमान निहारना या बिना किसी उद्देश्य के टहलना सामान्य बात थी। आज स्थिति बदल चुकी है। जैसे ही कुछ मिनट का खाली समय मिलता है, हाथ अपने-आप मोबाइल की ओर बढ़ जाता है। सोशल मीडिया, छोटे वीडियो, गेम … Read more

Friendship Recession: क्या हम दोस्त खोते जा रहे हैं? अकेलेपन की बढ़ती महामारी

दोस्ती का बदलता दौर: क्या रिश्तों में आ गया है सूखा? आज की दुनिया पहले से कहीं अधिक जुड़ी हुई दिखाई देती है। मोबाइल फोन, सोशल मीडिया, वीडियो कॉल और मैसेजिंग ऐप्स ने लोगों को एक क्लिक की दूरी पर ला दिया है। फिर भी एक अजीब विरोधाभास सामने आ रहा है—लोग पहले से ज्यादा … Read more

5 मिनट की जर्नलिंग का कमाल: क्या रोज़ लिखने की आदत तनाव कम कर सकती है?

एक समय था जब लोग अपनी भावनाएं डायरी के पन्नों पर लिखते थे। फिर मोबाइल, सोशल मीडिया और इंस्टेंट मैसेजिंग के दौर में यह आदत धीरे-धीरे कम होती गई। लेकिन अब दुनिया के कई मनोवैज्ञानिक और व्यवहार वैज्ञानिक फिर से जर्नलिंग की बात कर रहे हैं। जर्नलिंग का मतलब केवल दिनभर की घटनाएं लिखना नहीं … Read more

अच्छी नींद से भी ज़्यादा ज़रूरी है रोज़ एक ही समय पर सोना? ‘स्लीप रेगुलैरिटी’ का बड़ा सच

कई वर्षों तक स्वास्थ्य विशेषज्ञ यही कहते रहे कि एक स्वस्थ वयस्क को प्रतिदिन सात से नौ घंटे की नींद लेनी चाहिए। यह सलाह आज भी सही मानी जाती है, लेकिन अब नींद के विज्ञान में एक नया पहलू तेजी से चर्चा में है—स्लीप रेगुलैरिटी यानी रोज़ लगभग एक ही समय पर सोना और जागना। … Read more

‘ऑ’ (Awe) का विज्ञान: क्या प्रकृति में 20 मिनट बिताने से तनाव कम और जीवन में खुशी बढ़ सकती है?

डिजिटल युग ने हमें दुनिया से जोड़ दिया है, लेकिन प्रकृति से दूर भी कर दिया है। सुबह उठते ही मोबाइल स्क्रीन, दिनभर कंप्यूटर और रात तक सोशल मीडिया—यह दिनचर्या धीरे-धीरे हमारे मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है। ऐसे समय में मनोविज्ञान और न्यूरोसाइंस की दुनिया में एक दिलचस्प शब्द तेजी से चर्चा में … Read more

हुटूप गौशाला धाम: रांची में गोसेवा, पर्यावरण संरक्षण और भारतीय संस्कृति का प्रेरणादायी केंद्र

रांची से कुछ दूरी पर ओरमांझी के शांत और प्राकृतिक वातावरण में स्थित हुटूप गौशाला धाम केवल एक गौशाला नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति, करुणा,

लगातार बैठकर काम करना कितना खतरनाक? हर 30 मिनट बाद उठना आसान मंत्र

डिजिटल युग ने काम करने का तरीका पूरी तरह बदल दिया है। आज लाखों लोग दिन के आठ से दस घंटे कंप्यूटर, लैपटॉप या मोबाइल स्क्रीन के सामने बैठकर काम करते हैं। घर से काम करने की संस्कृति ने यह समय कई लोगों के लिए और बढ़ा दिया है। पहले जहां काम के दौरान स्वाभाविक … Read more

सिर्फ व्यायाम नहीं, सही समय भी है जरूरी: नई रिसर्च बता रही है क्यों सुबह की दिनचर्या बदल सकती है आपकी सेहत

कुछ वर्ष पहले तक स्वस्थ जीवन का अर्थ केवल संतुलित भोजन और नियमित व्यायाम माना जाता था। अब वैज्ञानिकों का ध्यान इस बात पर भी है कि हम कब खाते हैं, कब सोते हैं और किस समय व्यायाम करते हैं। इसे “सर्कैडियन हेल्थ” कहा जाता है। नई रिसर्च बताती है कि यदि हमारी दिनचर्या शरीर … Read more

क्या सप्ताह में एक दिन ‘डिजिटल उपवास’ बदल सकता है आपकी जिंदगी?

आज का दिन मोबाइल के अलार्म से शुरू होता है और रात की आखिरी नज़र भी अक्सर स्मार्टफोन की स्क्रीन पर ही जाती है। ऑफिस का काम, बैंकिंग, खरीदारी, मनोरंजन, पढ़ाई और दोस्तों से बातचीत—लगभग हर काम मोबाइल से जुड़ चुका है। ऐसे में यह कहना कि तकनीक छोड़ दें, व्यावहारिक नहीं है। लेकिन वैज्ञानिक … Read more