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20/09/2026 9:03 pm

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हेल्थ न्यूज

लगातार बैठकर काम करना कितना खतरनाक? हर 30 मिनट बाद उठना आसान मंत्र

डिजिटल युग ने काम करने का तरीका पूरी तरह बदल दिया है। आज लाखों लोग दिन के आठ से दस घंटे कंप्यूटर, लैपटॉप या मोबाइल स्क्रीन के सामने बैठकर काम करते हैं। घर से काम करने की संस्कृति ने यह समय कई लोगों के लिए और बढ़ा दिया है। पहले जहां काम के दौरान स्वाभाविक … Read more

सिर्फ व्यायाम नहीं, सही समय भी है जरूरी: नई रिसर्च बता रही है क्यों सुबह की दिनचर्या बदल सकती है आपकी सेहत

कुछ वर्ष पहले तक स्वस्थ जीवन का अर्थ केवल संतुलित भोजन और नियमित व्यायाम माना जाता था। अब वैज्ञानिकों का ध्यान इस बात पर भी है कि हम कब खाते हैं, कब सोते हैं और किस समय व्यायाम करते हैं। इसे “सर्कैडियन हेल्थ” कहा जाता है। नई रिसर्च बताती है कि यदि हमारी दिनचर्या शरीर … Read more

क्या सप्ताह में एक दिन ‘डिजिटल उपवास’ बदल सकता है आपकी जिंदगी?

आज का दिन मोबाइल के अलार्म से शुरू होता है और रात की आखिरी नज़र भी अक्सर स्मार्टफोन की स्क्रीन पर ही जाती है। ऑफिस का काम, बैंकिंग, खरीदारी, मनोरंजन, पढ़ाई और दोस्तों से बातचीत—लगभग हर काम मोबाइल से जुड़ चुका है। ऐसे में यह कहना कि तकनीक छोड़ दें, व्यावहारिक नहीं है। लेकिन वैज्ञानिक … Read more

बड़ी सफलता का राज 5 मिनट की छोटी आदतों में छिपा है? ‘माइक्रो हैबिट्स’ का नया मंत्र

हर नया साल आते ही लाखों लोग संकल्प लेते हैं कि अब रोज़ एक घंटा व्यायाम करेंगे, चीनी छोड़ देंगे, सुबह पांच बजे उठेंगे या हर दिन दस हजार कदम चलेंगे। लेकिन कुछ ही सप्ताह बाद अधिकांश लोग अपनी पुरानी दिनचर्या में लौट आते हैं। सवाल यह है कि ऐसा क्यों होता है? व्यवहार विज्ञान … Read more

दोस्ती के लिए नींद की कुर्बानी पड़ सकती है भारी! युवाओं की आदत पर चिंता

जब भी नींद खराब होने की बात होती है तो सबसे पहले मोबाइल फोन, सोशल मीडिया या वेब सीरीज़ को दोष दिया जाता है। लेकिन 2026 में प्रकाशित एक नई वैज्ञानिक रिसर्च ने एक अलग कारण की ओर ध्यान दिलाया है। शोधकर्ताओं ने पाया कि कई युवा मोबाइल की वजह से नहीं, बल्कि दोस्तों के … Read more

क्या खुलकर हंसना भी है एक तरह की थेरेपी? नई रिसर्च बता रही है हंसी का विज्ञान

आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में लोगों के पास काम के लिए समय है, लेकिन मुस्कुराने और खुलकर हंसने के लिए समय कम होता जा रहा है। दफ्तर का दबाव, आर्थिक चिंताएं, सोशल मीडिया की तुलना और लगातार बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने तनाव को जीवन का सामान्य हिस्सा बना दिया है। यही कारण है कि मानसिक … Read more

पैकेट वाला खाना सिर्फ पेट नहीं, दिमाग पर भी डाल सकता है असर? नई रिसर्च ने बढ़ाई चिंता?

भारत में पिछले एक दशक में खाने की आदतों में बड़ा बदलाव आया है। घर का बना भोजन अब धीरे-धीरे इंस्टेंट नूडल्स, पैकेट वाले स्नैक्स, शक्करयुक्त पेय, फ्रोजन फूड और रेडी-टू-ईट उत्पादों से प्रतिस्पर्धा कर रहा है। तेज़ जीवनशैली और सुविधा की चाह ने इन खाद्य पदार्थों की लोकप्रियता बढ़ाई है। लेकिन अब वैज्ञानिकों का … Read more

क्या दूसरों की मदद करने से बढ़ सकती है आपकी उम्र? क्या है नई ‘हेल्थ थेरेपी’?

आज की दुनिया में सफलता को अक्सर अच्छी नौकरी, बड़ा घर, ऊंची आय और सामाजिक प्रतिष्ठा से जोड़ा जाता है। लेकिन आधुनिक मनोविज्ञान और स्वास्थ्य विज्ञान एक अलग सवाल पूछ रहे हैं—यदि किसी व्यक्ति के पास सब कुछ हो, लेकिन उसके जीवन में कोई स्पष्ट उद्देश्य न हो, तो क्या वह वास्तव में स्वस्थ और … Read more

क्या डॉक्टर भविष्य में दवा के साथ ‘दोस्ती’ भी लिखेंगे? नई रिसर्च में खुलासा

आधुनिक चिकित्सा ने संक्रामक रोगों से लेकर जटिल सर्जरी तक अद्भुत उपलब्धियां हासिल की हैं। फिर भी तनाव, अकेलापन, चिंता, अवसाद और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां लगातार बढ़ रही हैं। डॉक्टरों और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के सामने अब एक नया सवाल है—क्या हर समस्या का समाधान केवल दवा हो सकती है? इसी प्रश्न ने दुनिया … Read more