मोबाइल और स्क्रीन के बीच किशोरों की जिंदगी में योग की नई भूमिका
आज के किशोर ऐसी दुनिया में बड़े हो रहे हैं जहां पढ़ाई, मनोरंजन, दोस्ती और जानकारी का बड़ा हिस्सा डिजिटल स्क्रीन पर मौजूद है। इस बदलती जीवनशैली ने मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक गतिविधि को लेकर नई चुनौतियां पैदा की हैं। ऐसे समय में योग और ध्यान को लेकर एक दिलचस्प सवाल सामने आया है: क्या इन अभ्यासों का संबंध केवल शारीरिक फिटनेस से है या वे किशोरों की जीवनशैली और मानसिक स्वास्थ्य के साथ भी जुड़े हो सकते हैं? 2026 में प्रकाशित एक भारतीय epidemiological study ने 13 से 19 वर्ष के 425 किशोरों में इसी सवाल को देखा।
“Yoga for Teenagers”
425 किशोरों में किस तरह तुलना की गई
अध्ययन में कुल 425 किशोर शामिल थे। इनमें 237 ऐसे प्रतिभागी थे जो योग, ध्यान या दोनों का अभ्यास करते थे, जबकि 188 ने इनमें से किसी का अभ्यास नहीं किया था। शोधकर्ताओं ने PROMIS pediatric measures के माध्यम से positive affect, global health और cognitive health जैसे पहलुओं का आकलन किया तथा कुछ lifestyle habits के बारे में भी जानकारी ली। अध्ययन का उद्देश्य यह देखना था कि योग और ध्यान का अभ्यास करने वाले किशोरों में कुछ स्वास्थ्य और मनोवैज्ञानिक संकेतकों की स्थिति कैसी दिखाई देती है। “Yoga for Teenagers”
योग-ध्यान करने वाले किशोरों में क्या अंतर मिला
शोधकर्ताओं ने पाया कि योग या ध्यान करने वाले किशोरों में positive affect का स्कोर बेहतर था और global health तथा cognitive health के कुछ मापों में भी सकारात्मक अंतर देखा गया। अध्ययन में positive affect के लिए p-value <0.001, global health के लिए p=0.03 और cognitive health के लिए p=0.02 रिपोर्ट किया गया। ये परिणाम सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण थे, लेकिन इनका अर्थ यह नहीं कि योग ने निश्चित रूप से इन सुधारों को पैदा किया। क्योंकि अध्ययन observational था, कारण और परिणाम के बीच सीधा संबंध स्थापित नहीं किया जा सकता। “Yoga for Teenagers”
यह फर्क क्यों महत्वपूर्ण है
किशोरावस्था में मानसिक स्वास्थ्य केवल पढ़ाई या परीक्षा के तनाव से तय नहीं होता। दोस्ती, परिवार, नींद, शारीरिक गतिविधि, सोशल मीडिया, आत्म-छवि और भविष्य को लेकर चिंता—कई कारक मिलकर इस उम्र के अनुभव को आकार देते हैं। यदि कोई गतिविधि किशोरों को अपने शरीर, सांस और ध्यान के साथ कुछ समय बिताने का अवसर देती है, तो वह उनकी दिनचर्या में अलग तरह की मानसिक जगह बना सकती है। लेकिन इस संभावना को प्रमाणित करने के लिए intervention trials की जरूरत है।
योग का मतलब केवल कठिन आसन नहीं
किशोरों के लिए योग को केवल headstand या कठिन flexibility poses से जोड़ना गलत दृष्टिकोण हो सकता है। योग में आसन के साथ breathing, ध्यान और relaxation जैसे घटक भी हो सकते हैं। किसी किशोर को रोजाना बहुत कठिन अभ्यास कराने की बजाय उसकी उम्र, क्षमता और रुचि के अनुसार सरल और सुरक्षित अभ्यास अधिक टिकाऊ हो सकता है। इस तरह योग शारीरिक गतिविधि के साथ self-regulation का अभ्यास भी बन सकता है।
ध्यान और positive affect के बीच संबंध कैसे समझें
Positive affect का अर्थ मोटे तौर पर सकारात्मक भावनाओं और मनोदशा से जुड़ा है। अध्ययन में योग और ध्यान करने वाले किशोरों में यह माप बेहतर पाया गया। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि ध्यान करने वाला हर किशोर हमेशा खुश रहेगा। मानसिक स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक हैं। योग और ध्यान को मानसिक स्वास्थ्य की एक सहायक आदत के रूप में देखना उचित है, लेकिन गंभीर चिंता, अवसाद या अन्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में पेशेवर सहायता की जरूरत हो सकती है। “Yoga for Teenagers”
NIMHANS की नई रिसर्च ने योग की एक दूसरी दिशा दिखाई
जुलाई 2026 में Asian Journal of Psychiatry में प्रकाशित एक feasibility study ने योग आधारित counselling programme विकसित और validate करने की कोशिश की। इसमें NIMHANS, Bengaluru के शोधकर्ता शामिल थे। कार्यक्रम केवल शारीरिक योग अभ्यास पर आधारित नहीं था, बल्कि योग दर्शन, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों और common mental disorders से जूझ रहे लोगों के अनुभवों को शामिल करके विकसित किया गया। अध्ययन तीन चरणों में हुआ—development, expert validation और feasibility testing।
‘योग से इलाज’ और ‘योग आधारित सहायक कार्यक्रम’ में फर्क
यहां शब्दों का सही इस्तेमाल बहुत महत्वपूर्ण है। NIMHANS से जुड़े इस अध्ययन का उद्देश्य एक structured yoga-based counselling programme की feasibility और validation देखना था। इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि योग अकेले अवसाद या anxiety का प्रमाणित उपचार है। मानसिक स्वास्थ्य उपचार में psychotherapy, medication, lifestyle interventions और अन्य clinical approaches की भूमिका व्यक्ति की स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है। योग को complementary approach के रूप में जांचना और उसे हर बीमारी का इलाज घोषित करना दो बिल्कुल अलग बातें हैं।
किशोरों के लिए योग का असली फायदा शायद ‘रूटीन’ में छिपा हो
किसी भी स्वास्थ्य आदत का फायदा तब ज्यादा उपयोगी हो सकता है जब उसे नियमित जीवनशैली में शामिल किया जा सके। यदि किशोर रोज कुछ समय स्क्रीन से दूर रहकर शारीरिक गतिविधि, श्वसन या ध्यान करता है, तो उसे अपने दिन में एक structured pause मिल सकता है। यह अकेले मानसिक स्वास्थ्य की गारंटी नहीं है, लेकिन स्वस्थ दिनचर्या का हिस्सा हो सकता है। इसके साथ पर्याप्त नींद, नियमित शारीरिक गतिविधि, पौष्टिक भोजन और परिवार तथा दोस्तों से स्वस्थ संबंध भी जरूरी हैं।
क्या माता-पिता को बच्चों पर योग थोपना चाहिए
नहीं। किसी भी lifestyle practice में स्वेच्छा और रुचि महत्वपूर्ण हैं। यदि माता-पिता योग को अनुशासन या सजा की तरह पेश करेंगे तो किशोर इसे अतिरिक्त दबाव के रूप में महसूस कर सकता है। इसके बजाय परिवार साथ में सरल योग या breathing practice करे तो यह साझा गतिविधि बन सकती है। किशोरों के लिए लक्ष्य शरीर को किसी आदर्श आकार में ढालना नहीं, बल्कि स्वस्थ movement, body awareness और stress management को बढ़ावा देना होना चाहिए।
स्कूलों में योग की भूमिका पर नए सवाल
यदि स्कूल योग और ध्यान को wellness programme का हिस्सा बनाते हैं तो उसे केवल प्रतियोगिता या प्रदर्शन तक सीमित नहीं करना चाहिए। सरल अभ्यास, प्रशिक्षित शिक्षक और विद्यार्थियों की सुरक्षा के साथ नियमित sessions अधिक उपयोगी हो सकते हैं। साथ ही यह भी जरूरी है कि स्कूल मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं वाले विद्यार्थियों के लिए counselling और professional support उपलब्ध कराएं। योग को mental-health services का विकल्प बनाना उचित नहीं होगा।
रिसर्च की सबसे बड़ी सीमा भी समझना जरूरी है
425 किशोरों का अध्ययन उपयोगी संकेत देता है, लेकिन यह randomized controlled trial नहीं था। प्रतिभागियों ने स्वयं बताया कि वे योग या ध्यान करते हैं या नहीं, इसलिए यह संभव है कि योग करने वाले किशोरों में पहले से ही कुछ ऐसी विशेषताएं हों जो उनके बेहतर स्वास्थ्य परिणामों से जुड़ी हों। उदाहरण के लिए परिवार का समर्थन, सामाजिक-आर्थिक स्थिति, नींद या अन्य healthy habits। इसलिए “योग करने से cognitive health बेहतर हुई” कहना अध्ययन से अधिक मजबूत दावा होगा। सही भाषा है कि योग और ध्यान का अभ्यास बेहतर outcomes के साथ associated पाया गया।
योग की अगली कहानी आसनों से आगे की है
2026 के दो भारतीय अध्ययनों से योग को लेकर एक दिलचस्प तस्वीर सामने आती है। 425 किशोरों के अध्ययन में योग और ध्यान करने वालों में positive affect, global health और cognitive health के कुछ बेहतर संकेत मिले, जबकि NIMHANS से जुड़े feasibility research ने योग दर्शन और counselling को common mental disorders के संदर्भ में व्यवस्थित तरीके से विकसित करने की दिशा दिखाई।
लेकिन विज्ञान अभी सावधानी की मांग करता है। इन अध्ययनों को योग के चमत्कारी प्रभाव का प्रमाण मानना उचित नहीं होगा। अधिक मजबूत clinical trials और लंबे समय तक follow-up जरूरी हैं। फिर भी एक बात स्पष्ट है—योग को केवल शरीर को मोड़ने वाले आसनों तक सीमित करके देखना उसके संभावित मानसिक और व्यवहारिक आयामों को छोटा कर देता है। आने वाले समय में योग पर शोध शायद इस सवाल पर ज्यादा केंद्रित होगा कि इसे स्कूल, परिवार और स्वास्थ्य सेवाओं में सुरक्षित, प्रमाण-आधारित और व्यावहारिक तरीके से कैसे शामिल किया जाए।






