
5 मिनट की जर्नलिंग का कमाल: क्या रोज़ लिखने की आदत तनाव कम कर सकती है?
एक समय था जब लोग अपनी भावनाएं डायरी के पन्नों पर लिखते थे। फिर मोबाइल, सोशल मीडिया और इंस्टेंट मैसेजिंग के दौर में यह आदत धीरे-धीरे कम होती गई। लेकिन अब दुनिया के कई मनोवैज्ञानिक और व्यवहार वैज्ञानिक फिर से जर्नलिंग की बात कर रहे हैं। जर्नलिंग का मतलब केवल दिनभर की घटनाएं लिखना नहीं … Read more

अच्छी नींद से भी ज़्यादा ज़रूरी है रोज़ एक ही समय पर सोना? ‘स्लीप रेगुलैरिटी’ का बड़ा सच
कई वर्षों तक स्वास्थ्य विशेषज्ञ यही कहते रहे कि एक स्वस्थ वयस्क को प्रतिदिन सात से नौ घंटे की नींद लेनी चाहिए। यह सलाह आज भी सही मानी जाती है, लेकिन अब नींद के विज्ञान में एक नया पहलू तेजी से चर्चा में है—स्लीप रेगुलैरिटी यानी रोज़ लगभग एक ही समय पर सोना और जागना। … Read more

‘ऑ’ (Awe) का विज्ञान: क्या प्रकृति में 20 मिनट बिताने से तनाव कम और जीवन में खुशी बढ़ सकती है?
डिजिटल युग ने हमें दुनिया से जोड़ दिया है, लेकिन प्रकृति से दूर भी कर दिया है। सुबह उठते ही मोबाइल स्क्रीन, दिनभर कंप्यूटर और रात तक सोशल मीडिया—यह दिनचर्या धीरे-धीरे हमारे मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है। ऐसे समय में मनोविज्ञान और न्यूरोसाइंस की दुनिया में एक दिलचस्प शब्द तेजी से चर्चा में … Read more

पूर्वोत्तर भारत के फर्मेंटेड बांस की कोपलें: सदियों पुरानी फूड कल्चर
पूर्वोत्तर भारत की भोजन संस्कृति देश के अन्य हिस्सों से काफी अलग और समृद्ध है। यहां बांस केवल निर्माण सामग्री नहीं, बल्कि भोजन का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। नागालैंड, मिजोरम, सिक्किम, मेघालय, मणिपुर और असम के कई क्षेत्रों में बांस की कोपलों (Bamboo Shoots) का उपयोग ताजा और फर्मेंटेड दोनों रूपों में किया जाता है। … Read more

क्या भारतीय फर्मेंटेड फूड्स हैं भविष्य का सुपरफूड? विज्ञान ने फिर से पहचानना शुरू किया
दुनिया भर में आजकल “गट हेल्थ” यानी आंतों की सेहत सबसे चर्चित स्वास्थ्य विषयों में शामिल है। दिलचस्प बात यह है कि जिस दिशा में आधुनिक विज्ञान तेजी से आगे बढ़ रहा है, भारत के कई हिस्सों में उसकी झलक सदियों पुरानी भोजन परंपराओं में पहले से मौजूद रही है। दक्षिण भारत की इडली और … Read more

दोस्ती के लिए नींद की कुर्बानी पड़ सकती है भारी! युवाओं की आदत पर चिंता
जब भी नींद खराब होने की बात होती है तो सबसे पहले मोबाइल फोन, सोशल मीडिया या वेब सीरीज़ को दोष दिया जाता है। लेकिन 2026 में प्रकाशित एक नई वैज्ञानिक रिसर्च ने एक अलग कारण की ओर ध्यान दिलाया है। शोधकर्ताओं ने पाया कि कई युवा मोबाइल की वजह से नहीं, बल्कि दोस्तों के … Read more

पैकेट वाला खाना सिर्फ पेट नहीं, दिमाग पर भी डाल सकता है असर? नई रिसर्च ने बढ़ाई चिंता?
भारत में पिछले एक दशक में खाने की आदतों में बड़ा बदलाव आया है। घर का बना भोजन अब धीरे-धीरे इंस्टेंट नूडल्स, पैकेट वाले स्नैक्स, शक्करयुक्त पेय, फ्रोजन फूड और रेडी-टू-ईट उत्पादों से प्रतिस्पर्धा कर रहा है। तेज़ जीवनशैली और सुविधा की चाह ने इन खाद्य पदार्थों की लोकप्रियता बढ़ाई है। लेकिन अब वैज्ञानिकों का … Read more

क्या दूसरों की मदद करने से बढ़ सकती है आपकी उम्र? क्या है नई ‘हेल्थ थेरेपी’?
आज की दुनिया में सफलता को अक्सर अच्छी नौकरी, बड़ा घर, ऊंची आय और सामाजिक प्रतिष्ठा से जोड़ा जाता है। लेकिन आधुनिक मनोविज्ञान और स्वास्थ्य विज्ञान एक अलग सवाल पूछ रहे हैं—यदि किसी व्यक्ति के पास सब कुछ हो, लेकिन उसके जीवन में कोई स्पष्ट उद्देश्य न हो, तो क्या वह वास्तव में स्वस्थ और … Read more

क्या डॉक्टर भविष्य में दवा के साथ ‘दोस्ती’ भी लिखेंगे? नई रिसर्च में खुलासा
आधुनिक चिकित्सा ने संक्रामक रोगों से लेकर जटिल सर्जरी तक अद्भुत उपलब्धियां हासिल की हैं। फिर भी तनाव, अकेलापन, चिंता, अवसाद और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां लगातार बढ़ रही हैं। डॉक्टरों और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के सामने अब एक नया सवाल है—क्या हर समस्या का समाधान केवल दवा हो सकती है? इसी प्रश्न ने दुनिया … Read more

क्या नाश्ते का समय तय कर सकता है आपकी सेहत?
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में सबसे पहले जिस आदत की अनदेखी होती है, वह है समय पर भोजन करना। कई लोग सुबह नाश्ता छोड़ देते हैं, कुछ लोग दोपहर तक केवल चाय या कॉफी के सहारे रहते हैं, जबकि कुछ देर रात भारी भोजन करके सो जाते हैं। आधुनिक जीवनशैली में भोजन का समय … Read more

बार-बार आते हैं Negative Thoughts? जानिए मन को शांत रखने के आसान उपाय




BIT Mesra Lit Night 2026, पुस्तक प्रदर्शनी और कविता-नाटक ने मोहा मन

